गुरुत्वाकर्षण का सिद्धांत: आइंस्टीन ने गुरुत्वाकर्षण का सिद्धांत पर काम किया, जिससे वे नए दर्पण बनाने में सफल रहे।

विश्व सामंजस्य: उनकी सामंजस्यपूर्ण दृष्टिकोण ने सामाजिक मुद्दों को समझने में मदद की, जैसे कि आपसी समरसता और शांति की बढ़ती महत्वपूर्णता।

स्थायिता और प्रतिबद्धता: आइंस्टीन की निरंतर प्रतिबद्धता और स्थायिता ने उन्हें उच्चतम स्तर की सोच और अद्वितीय योगदान की दिशा में आगे बढ़ने में सहायक हुई।

आईन्स्टीनियन सिद्धांत: उनका आईन्स्टीनियन सिद्धांत ने समय और स्थान के साथ संबंधित सिद्धांतों को बदल दिया और नई दृष्टिकोण प्रदान किया।

विकल्पता की सोच: आइंस्टीन ने समस्याओं को नए और आलोचनात्मक तरीके से हल करने की कला में अपनी शौर्य प्रदर्शित की।

क्वांटम तथा रिलेटिविटी सिद्धांत: उनका क्वांटम तथा रिलेटिविटी सिद्धांत ने भौतिक विज्ञान में विपरीत सोच का सृष्टि किया।

सूचना और ऊर्जा का संरचना: उनकी सोच ने सूचना और ऊर्जा के संरचनात्मक सिद्धांतों को बदला और विज्ञान में नए मानक स्थापित किए।

तात्कालिक मुद्दों का समर्थन: उनकी आलोचनात्मक सोच ने तात्कालिक समस्याओं का समर्थन किया और समाधानों की प्रेरणा प्रदान की।

विज्ञान और धर्म का संगम: उनका सिद्धांत विज्ञान और धर्म के संगम को समर्थन करता है, जिससे सभी धाराएँ एक दूसरे के साथ समर्थन में हो सकती हैं।

स्वयं समर्थन और आत्म-समर्थन: उनकी आत्म-समर्थन और स्वयं समर्थन की भावना ने उन्हें मुश्किलों का सामना करने में सहारा प्रदान किया।