दिल्ली का पुराना नाम क्या था? | Old Name of Delhi

दिल्ली का इतिहास

जैसा कि आप सबको पता है भारत सहित कई देशों में जितने भी राज्य हैं या फिर जितने भी ऐतिहासिक जगह है। उन सब का नाम वर्षों पहले कुछ और था, लेकिन जब-जब लोग आते गए, जब-जब इस देश में इस दुनिया में विकास होता गया, तब तब इस जगह पर हर एक चीज का नाम भी बदलता गया। ठीक ऐसा ही हुआ है महाभारत काल से प्रसिद्ध एक जगह थी जिसके कारण पांडवों और कौरवों में महायुद्ध हुआ था। कहा जाता है कि महाभारत होने का दो कारण था। (Old Name of Delhi)

दिल्ली का पुराना नाम क्या था | Old Name of Delhi
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एक वह कारण जो अभी तक चलता ही आ रहा है स्त्री और दूसरा कारण था कि जिस नाम से भी दिल्ली प्रसिद्ध है, उससे पहले भी ‘उसे जगह का एक नाम था’ इसके बारे में अभी हम आपको बताने वाले हैं तो उस जगह का नाम है, इंद्रप्रस्थ जिसके कारण पांडवों और कौरवों के बीच धामाशन युद्ध हुआ था।

जिसमें सहस्त्रों दोष-निर्दोष, अच्छा-बुरा, स्त्री-पुरुष और न जाने किस-किस चीज की बली चढ़ी उसके पश्चात इस महाभारत का अंत हुआ और आज कुछ अलग ही महाभारत चल रही है। हमारे दुनिया देश संसार में तो चलिए अभी हम आपके इंद्रप्रस्थ के संपूर्ण इतिहास के बारे में बताते हैं।

संपूर्ण कहानी (Old Name of Delhi)

दिल्ली, भारत का एक प्रमुख शहर है जिसका इतिहास अत्यंत विविध और रोमांचक है। दिल्ली का प्राचीन नाम ‘इंद्रप्रस्थ’ था, जो महाभारतकाल में बना था। इंद्रप्रस्थ को पांडवों का नगर कहा जाता है और इसका अद्भुत इतिहास वेदव्यास की महाभारत में मिलता है।

Old Name of Delhi

इंद्रप्रस्थ से लेकर दिल्ली का इतिहास विभिन्न सांगठनों, साम्राज्यों और सम्राटों के आगमन और दूरगामन के साथ जुड़ा हुआ है। सम्राट अशोक के समय से लेकर मुघल साम्राज्य तक, दिल्ली ने विभिन्न सांस्कृतिक और राजनीतिक परंपराएं देखी हैं।

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दिल्ली का सबसे प्रमुख इतिहासिक समय वर्तमान दिल्ली को एक उच्च शिखर पर ले जाता है – ‘दिल्ली सलतनत’ और ‘मुघल साम्राज्य’ का काल। दिल्ली सलतनत का आरंभ 13वीं सदी में इल्तुतमिश के द्वारा किया गया था और इसके बाद से दिल्ली ने एक नये अधिकारी और संस्कृति के रूप में अपना चेहरा बदला।

14वीं सदी में फिरोज शाह तुगलक ने दिल्ली को अपनी राजधानी बनाई और उसने दिल्ली को एक समृद्धि और सुंदरता का केंद्र बनाने के लिए कई परियोजनाएं आरंभ कीं। उसने दिल्ली को सुलतानपुरी कहा और उसने शहर को फरहानाबाद का नाम दिया था।

दिल्ली का सर्वाधिक चमत्कारी और सुंदर अध्याय मुघल साम्राज्य का है। 16वीं सदी में बाबर ने पानीपत की लड़ाई में बाबर की विजय के बाद, उसने दिल्ली को अपनी राजधानी बनाया और इसने मुघल साम्राज्य का आरंभ किया। मुघल साम्राज्य के समय, दिल्ली महान सांस्कृतिक और वास्तुकला के केंद्र के रूप में उभरी और इसने एक नये युग की शुरुआत की।

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Old Name of Delhi | Old

दिल्ली की शानदार रचनाएं

जैसे कि कुतुब मीनार, हुमायूं का मकबरा, रेड फोर्ट, और जामा मस्जिद, मुघल साम्राज्य की शान और गरिमा को दिखाती हैं। अकबर, जहाँगीर, और शाहजहाँ के काल में, दिल्ली को आर्थिक और सांस्कृतिक संदर्भ में एक नया आयाम मिला।

17वीं सदी में, औरंगजेब के काल में, दिल्ली में नये बदलाव हुए और साम्राज्य

का केंद्र आगरा स्थित हो गया। औरंगजेब ने बहुत सी वास्तुकला परियोजनाएं आरंभ कीं, लेकिन इसके बाद दिल्ली का शाही अधिकार धीरे-धीरे कमजोर हो गया।

18वीं सदी में, मराठों, और फिर ब्रिटिश उपनिवेशन के समय में, दिल्ली ने विद्रोह और परिवर्तन के समय को देखा। दिल्ली को ब्रिटिश राज की राजधानी बनाया गया और इसके चरम पर्व भी बदल गए।

1947 में भारत के स्वतंत्रता प्राप्त होने के बाद, दिल्ली ने नए भविष्य की ओर कदम बढ़ाया। दिल्ली को भारत की राजधानी बनाया गया और इसने देश की राजनीति, आर्थिक, और सांस्कृतिक गतिविधियों का केंद्र बनाया।

आज, दिल्ली भारत की सबसे बड़ी और सबसे महत्वपूर्ण नगरीय क्षेत्रों में से एक है, जिसमें सरकारी दफ्तर, सांसदों का संसद भवन, राष्ट्रपति भवन, और कई ऐतिहासिक स्थल शामिल हैं। दिल्ली ने विभिन्न कला और सांस्कृतिक परंपराओं को अपनाया है, और यह एक सुंदर और समृद्धिशील नगर है जो भारतीय इतिहास और सांस्कृतिक के अनेक पहलुओं को दर्शाता है।

इसके साथ ही, दिल्ली का इतिहास एक अद्वितीय यात्रा है जो सम्राटों, सलतानत, मुघल, और ब्रिटिश राज के समय की घटनाओं को आत्मसात करती है, जिससे यह नगर एक भौगोलिक, सांस्कृतिक, और ऐतिहासिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।

Frequently Asked Questions (FAQs) 

  • दिल्ली का प्राचीन नाम क्या था?

    दिल्ली का प्राचीन नाम ‘इंद्रप्रस्थ’ था, जो महाभारतकाल में बना था।

  • दिल्ली का सम्राटों के साथ कैसा संबंध था?

    दिल्ली ने विभिन्न सम्राटों के आगमन और दूरगामन के साथ अपना इतिहास बनाया, जैसे कि महाभारतीय सम्राट, मुघल सम्राट, और सलतानत के सम्राट।

  • दिल्ली सलतनत और मुघल साम्राज्य का क्या महत्व है?

    दिल्ली सलतनत ने 13वीं सदी में आरंभ होकर शहर को समृद्धि और सुंदरता का केंद्र बनाया, जबकि मुघल साम्राज्य ने 16वीं सदी से लेकर 19वीं सदी तक दिल्ली को सुंदर और सांस्कृतिक भरपूर बनाए रखा।

  • दिल्ली के अधिकृत राजधानी बनने का क्या कारण था?

    दिल्ली ने 1911 में ब्रिटिश साम्राज्य के दौरान कोलकाता की जगह भारत की राजधानी बनने का नाम किया और उसके बाद से ही यह भारत की राजधानी रही है।

  • दिल्ली का ऐतिहासिक संरचनाएं कौन-कौन सी हैं?

    दिल्ली की ऐतिहासिक संरचनाएं में कुतुब मीनार, हुमायूं का मकबरा, रेड फोर्ट, और जामा मस्जिद शामिल हैं, जो मुघल साम्राज्य की शान को दर्शाती हैं।

  • दिल्ली में ब्रिटिश साम्राज्य के काल में कैसा बदलाव हुआ?

    ब्रिटिश साम्राज्य के काल में, दिल्ली को ब्रिटिश राज की राजधानी बनाया गया और नए बदलाव हुए, जो भारतीय उपनिवेशन के साथ संबंधित थे।

  • दिल्ली का वर्तमान स्वरूप कैसा है?

    वर्तमान में, दिल्ली भारत की राजधानी है और यह सरकारी दफ्तर, संसद भवन, राष्ट्रपति भवन, और अन्य महत्वपूर्ण स्थलों का केंद्र है।

  • दिल्ली का स्थानीय सांस्कृतिक महत्व क्या है?

    दिल्ली ने अपनी विभिन्न सांस्कृतिक परंपराओं को बनाए रखा है और इसमें भारतीय इतिहास और सांस्कृतिक के कई पहलुओं को दर्शाता है।

  • दिल्ली में दर्शनीय स्थल कौन-कौन से हैं?

    दिल्ली में कई दर्शनीय स्थल हैं, जैसे कि कुतुब मीनार, इंडिया गेट, लोटस टेंपल, और राज घाट, जो आधुनिकता और परंपरा का अद्वितीय मिश्रण प्रदर्शित करते हैं।

  • दिल्ली का भविष्य कैसा है?

    दिल्ली आज भी एक महत्वपूर्ण नगर है और इसका भविष्य भी सकारात्मक दृष्टि से है, जिसमें सांस्कृतिक, आर्थिक, और तकनीकी क्षेत्रों में और भी विकास होने की उम्मीद है।

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Rinku Kumar
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Rinku Kumar is a talented and aspiring blogger known for her captivating content and insightful perspectives. Born on March 20, 2002, in Janta West, Muzaffarpur, Bihar, Rinku discovered her passion for writing at an early age. Growing up in a world of ever-evolving digital media, she found herself drawn to the vast opportunities for self-expression and communication offered by the internet.

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